रायपुर। प्रदेश के स्कूली विद्यार्थियों को अब नए शैक्षणिक सत्र से अपनी माटी की लोक परंपराओं, स्थानीय पहचान और व्यावहारिक ज्ञान को करीब से जानने का मौका मिलेगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए सत्र में मुख्य रूप से कक्षा चौथी और सातवीं के सिलेबस को अपडेट किया गया है, जिसमें सबसे बड़ा बदलाव हिंदी विषय में देखने को मिला है।
नए पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों में स्थानीय पहचान के साथ-साथ सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विषयों की व्यावहारिक समझ विकसित करने का प्रयास किया गया है। चौथी कक्षा की हिंदी पाठ्यपुस्तक में करीब 30 प्रतिशत का बदलाव किया गया है। यहा हवा और धूल और कैमरा जैसे दो अध्यायों को हटाकर हिमालय, दोस्त हमारे, बस्तर का दशहरा, सड़क सुरक्षा और संस्कृत जैसे पांच नए उपयोगी चैप्टर जोड़े गए हैं। इसके अलावा पर्यावरण अध्ययन के संबंध में भी कुछ बदलाए किए गए हैं। स्वास्थ्य के लिए भोजन के स्थान पर सेहत की थाली को शामिल किया गया है।
गणित के व्यावहारिक ज्ञान पर जोर
गणित का व्यावहारिक ज्ञान बढ़ाने के लिए खरीदारी के मजे नामक नया अध्याय जोड़ा गया है। आर्ट एजुकेशन में नृत्य मेरे आस-पास को बदलकर आस-पास के नृत्य किया गया है। सातवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में बिना किसी पुराने अध्याय को हटाए, कई महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक विषय जोड़े गए हैं। इसके हिंदी विषय में 25 प्रतिशत का बदलाव हुआ है, जिसमें मितानी छत्तीसगढ़ लोक कला, करिया बादर, पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजनबाई की जीवनी और सड़क चिन्ह एवं सड़क संकेत जैसे अध्यायों को स्थान मिला है।
अन्य विषयों को किया गया अपडेट
सामाजिक विज्ञान में बच्चों को जागरूक बनाने के लिए आओ प्राथमिक उपचार को जानें और नशे के दुष्प्रभाव से बचपन बचाएं जैसे जरूरी अध्याय जोड़े गए हैं। अंग्रेजी में ट्रेवल के स्थान पर फ्रॉम अ रेलवे कैरेज को शामिल किया गया है। संस्कृत में सिहावा शैलजा नामक नया अध्याय जोड़ा गया है।
अगले सत्र में 5वीं और 8वीं की बारी
एससीईआरटी के असिस्टेंट डायरेक्टर कौस्तुभ बनर्जी के अनुसार, इस साल केवल चौथी और सातवीं के सिलेबस में ही संशोधन किया गया है। आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा 5वीं और 8वीं की किताबों को बदलने का कार्य शुरू किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक रूप से जागरूक नागरिक बनाना है।

