अमेरिका ; ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान चलाते हुए उसके कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार इस कार्रवाई का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नागरिक और वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने वाली ईरानी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था। राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान को हालिया घटनाओं के जवाब में उठाया गया कदम बताया गया।
हमलों के बाद दक्षिणी ईरान के जास्क, बंदर अब्बास और सीरिक सहित कई क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात पर नजर रखी जा रही है।
ईरान ने कार्रवाई को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
अमेरिकी हमलों पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के विरुद्ध बताते हुए कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी देश ने अपनी भूमि या सैन्य ठिकानों का उपयोग उसके खिलाफ हमलों के लिए करने दिया, तो ऐसे ठिकानों को आत्मरक्षा के तहत वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा। साथ ही, अमेरिका द्वारा मस्कट वार्ता को लेकर किए गए दावों को भी ईरान ने अस्वीकार करते हुए उन्हें भ्रामक बताया और संयुक्त राष्ट्र से मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
होर्मुज को लेकर अमेरिका का दावा
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि हालिया घटनाओं के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही जारी है। अमेरिका ने दावा किया कि कूटनीतिक प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके, जिसके बाद सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

