मालदीव का नाम आते ही आंखों के सामने नीला समंदर, सफेद रेत और आलीशान रिसॉर्ट की तस्वीर उभरती है। लेकिन इस द्वीपीय देश की एक और खास पहचान है, जो हर सुबह यहां के घरों से लेकर रिसॉर्ट तक में दिखाई देती है। इसका नाम है मास हुनी। यह ऐसा पारंपरिक नाश्ता है, जिसे पीढ़ियों से लगभग बिना किसी बदलाव के तैयार किया जा रहा है।दिखने में बेहद साधारण यह व्यंजन स्वाद, पोषण और परंपरा का अनोखा संगम है। यही वजह है कि मालदीव आने वाले पर्यटक भी एक बार इसका स्वाद जरूर लेना चाहते हैं।
क्या है मास हुनी?
मास हुनी एक पारंपरिक मालदीवी व्यंजन है, जिसे मुख्य रूप से स्मोक्ड टूना, ताजा कसे हुए नारियल, बारीक कटे प्याज, हरी मिर्च और नींबू के रस से तैयार किया जाता है। इन सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर बनाया जाता है और इसे आमतौर पर रोशी नाम की पतली तवे पर बनी रोटी के साथ परोसा जाता है।इसका स्वाद एक साथ कई एहसास देता है। स्मोक्ड टूना की गहराई, नारियल की हल्की मिठास, हरी मिर्च की तीखापन और नींबू की ताजगी इसे बेहद संतुलित और स्वादिष्ट बना देती है।
स्वाद का राज छिपा है तैयारी के तरीके में
मालदीव के अनुभवी शेफ बताते हैं कि मास हुनी का असली स्वाद केवल अच्छी सामग्री से नहीं, बल्कि उसे मिलाने की सही प्रक्रिया से आता है।सबसे पहले प्याज और हरी मिर्च को नमक तथा नींबू के रस के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है, जिससे प्याज का तीखापन कम हो जाता है और उसका प्राकृतिक स्वाद उभरकर सामने आता है। इसके बाद इसमें स्मोक्ड टूना और ताजा नारियल मिलाया जाता है। इस व्यंजन में किसी जटिल तकनीक की जरूरत नहीं होती। अगर सामग्री ताजा हो और अनुपात सही हो, तो इसका स्वाद अपने आप निखर जाता है।
हर मालदीवी परिवार से जुड़ी है इसकी याद
मास हुनी सिर्फ एक रेसिपी नहीं, बल्कि मालदीव के लोगों की पारिवारिक संस्कृति का हिस्सा है। अधिकांश लोग बचपन से अपने घरों में इसे बनते और खाते हुए बड़े होते हैं।कई परिवारों में बच्चे बगीचे से ताजी मिर्च तोड़कर लाते हैं, जबकि बड़े सदस्य टूना और नारियल तैयार करते हैं। यही वजह है कि यह व्यंजन केवल भोजन नहीं, बल्कि यादों और पारिवारिक रिश्तों से भी जुड़ा हुआ है।
मालदीव की खाद्य संस्कृति में टूना का अहम स्थान
मालदीव की रसोई में टूना मछली सबसे महत्वपूर्ण खाद्य सामग्री मानी जाती है। यहां इसे स्मोक्ड, ताजा, सुखाकर और अलग-अलग पारंपरिक तरीकों से तैयार किया जाता है।यही टूना श्रीलंका और दक्षिण भारत के कई व्यंजनों में भी इस्तेमाल होता है। श्रीलंका के साम्बोल और करी से लेकर दक्षिण भारतीय चटनी, रसम और अन्य पारंपरिक पकवानों में सूखी मालदीवी मछली स्वाद को और गहरा बनाती है।
पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार मछली पकड़ने की परंपरा
मालदीव की एक बड़ी विशेषता उसकी पारंपरिक पोल एंड लाइन फिशिंग तकनीक है। इस तरीके में एक बार में केवल एक मछली पकड़ी जाती है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है और अनावश्यक समुद्री जीवों का शिकार नहीं होता।यह टिकाऊ मत्स्य पालन का ऐसा उदाहरण है, जिसकी आज पूरी दुनिया सराहना करती है।
बचे हुए मास हुनी से भी तैयार होते हैं कई स्वादिष्ट व्यंजन
मालदीव में भोजन की बर्बादी लगभग नहीं के बराबर होती है। यदि मास हुनी बच जाए तो उससे कई दूसरे लोकप्रिय व्यंजन तैयार किए जाते हैं।बचे हुए मिश्रण को आटे में भरकर मास रोशी बनाया जाता है, जबकि चावल के आटे के साथ मिलाकर कुरकुरे गुल्हे भी तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा शकरकंद, कद्दू या हरी पत्तेदार सब्जियों से बने शाकाहारी संस्करण भी काफी पसंद किए जाते हैं।
स्वाद के साथ सेहत का भी बेहतरीन विकल्प
मास हुनी को पौष्टिक नाश्तों में गिना जाता है। इसमें तेल का इस्तेमाल नहीं होता, प्रोटीन भरपूर मात्रा में मिलता है और ताजा नारियल शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है।कम मसालों और प्राकृतिक सामग्री से तैयार होने के कारण यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यही कारण है कि पारंपरिक मालदीवी भोजन की पहचान आज भी इस साधारण लेकिन खास व्यंजन से होती है।

