US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब और गहरा गया है। अमेरिकी सेना ने गुरुवार को लगातार छठी रात ईरान के विभिन्न रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह सैन्य अभियान गुरुवार दोपहर शुरू हुआ, जिसमें कई रक्षा प्रतिष्ठानों और सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया गया।
बंदर अब्बास में सबसे ज्यादा असर
ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक अमेरिकी हमलों का सबसे अधिक प्रभाव दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में देखने को मिला। वहीं ईरानी सरकारी टेलीविजन ने भी पुष्टि की कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित इस महत्वपूर्ण बंदरगाह और आसपास के इलाकों में मिसाइल हमले हुए हैं।
रिहायशी क्षेत्र भी आया चपेट में
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सैन्य ठिकानों के साथ बंदर अब्बास का एक रिहायशी इलाका भी हमलों से प्रभावित हुआ है। इस घटना में कम से कम सात नागरिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दल तैनात कर दिए गए हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
अमेरिकी सेना ने क्या कहा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में कहा कि अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता और परिचालन ढांचे को कमजोर करना था। सेना का दावा है कि कार्रवाई केवल सैन्य महत्व वाले ठिकानों और संसाधनों को ध्यान में रखकर की गई। हालांकि स्थानीय मीडिया में नागरिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।
व्हाइट हाउस का बातचीत को लेकर बड़ा बयान
सैन्य कार्रवाई के कुछ घंटे पहले व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है और ईरान बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की इच्छा जता रहा है।
सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशें जारी
कैरोलिन लेविट ने दावा किया कि हालिया सैन्य कार्रवाई से ईरान को बड़ा नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद वह वार्ता के माध्यम से स्थिति को संभालने में रुचि दिखा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सैन्य टकराव आगे और तेज होता है या कूटनीतिक प्रयास किसी समाधान तक पहुंच पाते हैं।

