US-Iran Conflict: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव और गहरा गया है। अमेरिकी सेना ने गुरुवार को लगातार पांचवीं रात ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। इस कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
बंदर अब्बास समेत कई रणनीतिक ठिकाने बने निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड की अगुवाई में चलाए गए इस सैन्य अभियान में ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और आसपास के सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया। यह इलाका रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि यहां से खाड़ी क्षेत्र की सैन्य और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।
ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर करना बताया गया उद्देश्य
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह अभियान गुरुवार दोपहर शुरू किया गया था। अमेरिकी सेना का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता, मिसाइल सिस्टम और तटीय रक्षा ढांचे को कमजोर करना था।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार लगातार किए गए हमलों से ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा है। ताजा हमलों के बाद ईरान और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
व्हाइट हाउस का दावा, बातचीत के लिए तैयार है ईरान
सैन्य कार्रवाई के कुछ घंटे पहले व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी संपर्क को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
लेविट के अनुसार अमेरिकी सैन्य दबाव के चलते ईरान बातचीत के जरिए समाधान तलाशने में रुचि दिखा रहा है। हालांकि, ईरान की ओर से इस दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हमलों के बीच जारी हैं कूटनीतिक प्रयास
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत दोनों के जरिए ईरान पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन के लिए दबाव बनाया जा सकता है। दूसरी ओर, विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य कार्रवाई और पर्दे के पीछे चल रही बातचीत के बीच संतुलन बनाना दोनों देशों के लिए बड़ी चुनौती है।
फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संघर्ष बढ़ता है या कूटनीतिक प्रयास किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ते हैं।

