शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य वरिंदर सिंह बाजवा का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। 82 वर्षीय बाजवा की मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद पंजाब की राजनीति में शोक की लहर है। अलग अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताते हुए उनकी पत्नी जगजीत कौर के प्रति संवेदना व्यक्त की।
चार दशक से ज्यादा लंबा रहा राजनीतिक सफर
वरिंदर सिंह बाजवा ने वर्ष 1980 में शिरोमणि अकाली दल के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वह वर्ष 1995 में होशियारपुर अकाली दल इकाई के अध्यक्ष बने। पार्टी में लंबे समय तक काम करने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया।
बाजवा ने वर्ष 2004 से 2010 तक राज्यसभा सदस्य के तौर पर पंजाब का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश से जुड़े कई मुद्दों को संसद में उठाया और राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई।
अकाली दल छोड़ा, कांग्रेस में गए और फिर हुई घर वापसी
वरिंदर सिंह बाजवा का राजनीतिक सफर सिर्फ अकाली दल तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2017 में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। हालांकि, पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 से पहले उन्होंने एक बार फिर अकाली दल में वापसी कर ली।
उनकी इस वापसी को अकाली दल के साथ उनके लंबे राजनीतिक जुड़ाव की वापसी के तौर पर देखा गया था। पार्टी में उनकी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए वह वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे।
पत्नी जगजीत कौर के प्रति नेताओं ने जताई संवेदना
वरिंदर सिंह बाजवा के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उनकी पत्नी जगजीत कौर के प्रति संवेदना जताते हुए परिवार को इस कठिन समय में मजबूती मिलने की कामना की।
जगजीत कौर होशियारपुर के सरकारी कॉलेज में शिक्षाविद के तौर पर भी जुड़ी रही हैं। बाजवा के निधन से परिवार, समर्थकों और उनके राजनीतिक सहयोगियों में शोक का माहौल है।
सोमवार को होगा अंतिम संस्कार
वरिंदर सिंह बाजवा का अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा। उनके अंतिम संस्कार में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के शामिल होने की संभावना है। उनके निधन के साथ पंजाब की राजनीति ने एक ऐसे वरिष्ठ नेता को खो दिया है, जिसका राजनीतिक सफर कई दशकों तक अलग अलग दौर और दलों से होकर गुजरा।

