Indore News: इंदौर में करोड़ों रुपये की बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम 2002 के तहत करीब 13 करोड़ रुपये मूल्य की 18 संपत्तियों को अटैच किया है। यह मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW की ओर से भोपाल में दर्ज की गई FIR के आधार पर आगे बढ़ा।
मामला इंदौर के मानपुर स्थित शारदा वेयरहाउस से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि वेयरहाउस में किसानों की उपज रखे होने का दावा करते हुए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और रसीदें तैयार की गईं। इन्हीं के आधार पर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से करोड़ों रुपये का लोन हासिल किया गया।
फर्जी रसीदों के सहारे 42 किसानों के नाम पर लिया गया करोड़ों का लोन
जांच एजेंसी के अनुसार शारदा वेयरहाउस के मालिक आलोक शारदा ने अन्य लोगों के साथ मिलकर वेयरहाउस रसीद वित्त योजना का कथित दुरुपयोग किया। वेयरहाउस में सोयाबीन और चने का पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने का दावा करते हुए रसीदें जारी की गईं।
इन दस्तावेजों के आधार पर 42 किसानों के नाम पर 62 हजार से ज्यादा बोरी सोयाबीन और चने के बदले लोन लिया गया। आरोप यह भी है कि वेयरहाउस में जमा बताई गई उपज को बिना अनुमति के बेच दिया गया।
वेयरहाउस की जांच में खुली पूरी गड़बड़ी
मामले की जांच के दौरान जब वेयरहाउस में रखे स्टॉक का निरीक्षण किया गया तो दावा किए गए माल और मौके पर मौजूद उपज में बड़ा अंतर सामने आया। इसी के बाद फर्जी रसीदों और लोन से जुड़े पूरे मामले की परतें खुलने लगीं।
ED की जांच में बैंक और वित्तीय संस्थाओं को हुए नुकसान को भी मामले का अहम हिस्सा माना गया है।
IDBI बैंक को 14 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
ED के मुताबिक इस कथित धोखाधड़ी से IDBI बैंक को करीब 14.04 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। इसके अलावा किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज की ओर से भी वेयरहाउस में रखी उपज के आधार पर करीब 12 करोड़ रुपये की रसीद जारी की गई थी।
बाद में निरीक्षण के दौरान वेयरहाउस में दावा की गई मात्रा के मुकाबले काफी कम उपज मिली। इससे वित्तीय संस्थाओं के सामने रखे गए स्टॉक और उससे संबंधित दस्तावेजों पर सवाल खड़े हुए।
मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत संपत्तियों पर ED की कार्रवाई
मामले में जांच एजेंसी ने 10 सितंबर को कार्रवाई करते हुए करीब 13 करोड़ रुपये कीमत की 18 संपत्तियों को अटैच किया है। यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की गई है।
फिलहाल एजेंसियां मामले की आगे जांच कर रही हैं। बैंक धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज और कथित तौर पर उपज की अनधिकृत बिक्री से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में और संपत्तियों या आरोपियों को लेकर कार्रवाई होने की संभावना बनी हुई है।

