गर्भावस्था के दौरान गर्भनाल यानी एम्बिलिकल कॉर्ड मां और शिशु के बीच जीवनरेखा का काम करती है। इसी के माध्यम से बच्चे को ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। जन्म के बाद डॉक्टर गर्भनाल को काट देते हैं, लेकिन उसका छोटा हिस्सा कुछ समय के लिए नवजात की नाभि से जुड़ा रहता है ताकि संक्रमण का खतरा कम हो।
आमतौर पर एक से तीन सप्ताह के भीतर यह हिस्सा सूखकर अपने आप अलग हो जाता है। इस दौरान नाभि को साफ और सूखा रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
गर्भनाल को लेकर क्या हैं पारंपरिक मान्यताएं
देश के अलग-अलग हिस्सों में गर्भनाल को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं। कई परिवार इसे सामान्य जैविक अवशेष की तरह नहीं फेंकते, बल्कि विशेष तरीके से सुरक्षित रखते हैं।
कुछ प्रमुख मान्यताएं इस प्रकार हैं।
- कई परिवार गर्भनाल को जमीन में दबा देते हैं। मान्यता है कि इससे बच्चे का प्रकृति से जुड़ाव मजबूत होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
- कुछ लोग इसे साफ कपड़े में लपेटकर सुरक्षित डिब्बे में संभालकर रखते हैं। उनके लिए यह बच्चे के जन्म की एक भावनात्मक याद होती है।
- कुछ समुदायों में गर्भनाल को छोटे लॉकेट या ताबीज में सुरक्षित रखने की परंपरा भी है। इसे धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वास से जोड़ा जाता है।
क्या कहता है विज्ञान
वैज्ञानिक दृष्टि से गर्भनाल जन्म के बाद शरीर का एक जैविक ऊतक मात्र होती है। वर्तमान चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इसे सुरक्षित रखने, दफनाने या नष्ट करने से बच्चे के स्वास्थ्य, भाग्य या भविष्य पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
हालांकि जन्म के बाद नाभि की सही देखभाल बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान संक्रमण का खतरा बना रहता है।
नवजात की नाभि की देखभाल कैसे करें
- नाभि वाले हिस्से को हमेशा साफ और सूखा रखें।
- उसे अनावश्यक रूप से छूने से बचें।
- छूने से पहले हाथ अच्छी तरह धो लें।
- नाभि पर कोई घरेलू लेप, तेल या पाउडर बिना डॉक्टर की सलाह के न लगाएं।
- यदि बदबू, सूजन, लगातार खून आना या पस दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
परंपरा और स्वास्थ्य दोनों का रखें ध्यान
गर्भनाल को सुरक्षित रखना या उसका विशेष तरीके से विसर्जन करना पूरी तरह व्यक्तिगत, पारिवारिक और सांस्कृतिक परंपराओं पर निर्भर करता है। वहीं चिकित्सा विशेषज्ञों का जोर इस बात पर है कि नवजात की नाभि की सही देखभाल की जाए, ताकि संक्रमण जैसी जटिलताओं से बचा जा सके।

